सिलीगुड़ी: आगामी दुर्गा पूजा और त्योहारी सीजन को देखते हुए उत्तर बंगाल के पर्यटन उद्योग में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। दार्जिलिंग, कालिम्पोंग और डुआर्स के विभिन्न पर्यटन केंद्रों में 70 प्रतिशत से अधिक होटल और होमस्टे के कमरों की एडवांस बुकिंग हो चुकी है। स्थानीय होमस्टे संचालकों और टूर ऑपरेटरों के अनुसार, कोविड महामारी के बाद इस बार बड़ी संख्या में पर्यटकों के उत्तर बंगाल पहुंचने की उम्मीद है। दुर्गा पूजा के दौरान पहाड़ और डुआर्स की प्राकृतिक सुंदरता के साथ बंगाल की पूजा संस्कृति पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। पश्चिम बंगाल की दुर्गा पूजा अपनी भव्यता, कलात्मकता और विशिष्ट सांस्कृतिक परंपराओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसे यूनेस्को ने अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में भी मान्यता दी है। बंगाल में मां दुर्गा को केवल देवी के रूप में नहीं, बल्कि अपने बच्चों लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ मायके आने वाली बेटी के रूप में देखा जाता है। पांच दिनों तक चलने वाला यह उत्सव धार्मिक आस्था के साथ पारिवारिक और भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक है।
कोलकाता सहित पूरे बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान हजारों आकर्षक पंडाल तैयार किए जाते हैं। पंडालों में ऐतिहासिक, सामाजिक और कलात्मक विषयों को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत किया जाता है, जिन्हें देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक पहुंचते हैं।
दुर्गा पूजा अब धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य और खान-पान के उत्सव के रूप में भी पहचान बना चुकी है। धुनुची नृत्य, संधि पूजा और विजयादशमी के दिन सिंदूर खेला जैसे पारंपरिक आयोजन इस उत्सव को और खास बनाते हैं। यही सांस्कृतिक आकर्षण उत्तर बंगाल के पर्यटन कारोबार को भी नई गति दे रहा है।

























