सिर्फ साधारण पुल नहीं एक गौरवगाथा हैं कोरोनेशन ब्रिज
सिलीगुड़ी: तीस्ता नदी की गहरी घाटी में स्थित कोरोनेशन ब्रिज, जिसे ‘बाघपूल’ भी कहा जाता है । पूर्वोत्तर भारत की ऐतिहासिक धरोहर और इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण है। पुल के दोनों ओर बने बाघों के शिल्प इसकी खास पहचान हैं।
नवंबर 1937 में तत्कालीन बंगाल के गवर्नर सर जॉन एंडरसन ने पुल की आधारशिला रखी थी। जानकारी अनुसार बाढ़ में बह गया एंडरसन ब्रिज
सेवक से पहले तीस्ता बाजार के पास 1933 में ‘एंडरसन ब्रिज’ के नाम से प्रसिद्ध यह पुल कालिम्पोंग के व्यापारिक संपर्क का प्रमुख माध्यम था, लेकिन अक्टूबर 1968 की विनाशकारी बाढ़ में तीस्ता की तेज धारा इसे बहा ले गई।
1941 में बनकर तैयार कोरोनेशन ब्रिज का निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर जॉन चैम्बर्स ने किया था। नदी के भीतर खंभे बनाना कठिन होने के कारण दोनों किनारों की चट्टानों में विशाल कंक्रीट आर्च को मजबूती से एंकर कर पुल तैयार किया गया। ज्ञात हो 2011 के भूकंप में पुल के मुख्य आर्च में बड़ी दरार आई थी, जिसके बाद भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया गया। बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए सेवक क्षेत्र में मोंगपोंग और एलेनबारी को जोड़ने वाले वैकल्पिक पुल की योजना है। नया मार्ग तैयार होने के बाद कोरोनेशन ब्रिज को भारी यातायात से राहत मिलने और इसके संरक्षण की उम्मीद है। तब से लेकर अब तक यह पुल तीस्ता घाटी में इतिहास, संघर्ष और स्थापत्य कौशल की जीवंत विरासत के रूप में खड़ा है।

























