गंगा के मैदान से लेकर समुद्र, पहाड़, डुआर्स और तराई तक प्राकृतिक संपदा
सिलीगुड़ी: पश्चिम बंगाल में गंगा के विशाल मैदानी क्षेत्र से लेकर समुद्र, ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं, नेवरा वैली के जंगलों, डुआर्स और तराई की प्राकृतिक सुंदरता तथा असंख्य नदियों तक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्राकृतिक पर्यावरण और वन्यजीवों के प्राकृतिक विचरण क्षेत्र को सुरक्षित रखते हुए इन संसाधनों को पर्यटन उद्योग से जोड़कर राज्य को विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है।
शनिवार को चालसा स्थित एक निजी रिसॉर्ट में पर्यटन विभाग की ओर से पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ आयोजित बैठक में पर्यटन मंत्री तथा सिलीगुड़ी के विधायक शंकर घोष ने यह बात कही। बैठक में रिसॉर्ट मालिक, होमस्टे संचालक, जिप्सी चालक व मालिक, बस मालिक सहित पर्यटन उद्योग से जुड़े विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
बैठक का उद्घाटन मंत्री शंकर घोष ने किया। इस अवसर पर मालबाजार के विधायक शुक्रा मुंडा, नागराकाटा के विधायक पूना भेंगरा, जलपाईगुड़ी के विधायक अनंत देव अधिकारी, जिलाधिकारी अदिति चौधरी, जिला पुलिस अधीक्षक सुजाता कुमारी बीनापाणी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।
बैठक में पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों ने अपनी समस्याएं और सुझाव विभाग के समक्ष रखे। पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने समस्याओं को दर्ज करते हुए उनके समाधान की दिशा में आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया।
मंत्री शंकर घोष ने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल के पर्यटन को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से पर्यटन उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ लगातार चर्चा की जा रही है। विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए आधुनिक सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राज्य के प्रत्येक जिले में किसी विशेष मेले अथवा महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल को केंद्र में रखकर पर्यटन विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुलिस प्रशासन से अलग हेल्पलाइन शुरू करने का अनुरोध किया गया है। पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि राज्य में पर्यटन अब एक महत्वपूर्ण उद्योग के रूप में उभर रहा है। इसे और अधिक विकसित करने के लिए सरकार, प्रशासन और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। बैठक में पहाड़, तराई और डुआर्स के विभिन्न क्षेत्रों से आए पर्यटन उद्योग के हितधारकों ने अपनी समस्याओं और सुझावों को विभाग के समक्ष रखा।

























